जय हो नरमदे तेरी जय जय कार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सदियों से माँ बेहती आई तेरी पावन धार,

जय हो नरमदे तेरी जय जय कार

तेरी जय जय कार हो मैया तेरी तेरी जय जय कार,

माँ की महिमा कोई न जाने केहते है ये लोड सयाने

विपदाओं को हर लेती है कोई माने या ना माने

माई तेरे अमृत जल ने सब पे किया उपकार ,

जय हो नरमदे तेरी जय जय कार

ऋषि मुनि और ग्यानी ध्यानी बाजे तेरी अमर कहानी

मैं कल पर्वत से भरू अजतक निर्मल करती सब जिंदगानी

भगती भाव से मात तुम्हे पूजे ये सारा संसार

जय हो नरमदे तेरी जय जय कार

करके सुमिरन मैया तेरा जीव जन्म तर जाते है

तेरे पावन निर्मल जल से लोग सुखी हो जाते है

साहिल की कभी आस न टूटे कर दो बेडा पार

जय हो नरमदे तेरी जय जय कार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।