माह्पे कुलदेवी की किरपा होई फुले पले परिवार

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

माह्पे कुलदेवी की किरपा होई फुले पले परिवार

मैया की किरपा से माहरो भरे रवे भण्डार,

जब कोई विपदा सिर पे आवे मनडो ना गबरावे जी ,

सोंप दई मैया के हाथो नैया की पतवार

माह्पे कुलदेवी की किरपा होई फुले पले परिवार

अपनी चुनडी की छैया में हर दम राखे माने जी ,

म्हारो तो म्हारी मैया पे पुरो दारमदार

माह्पे कुलदेवी की किरपा होई फुले पले परिवार

सब के वस् की बात नही है कौन ईतनी परवाह करे

माहरे घर को घ्यान में राखे बन एक पेहरे दार,

माह्पे कुलदेवी की किरपा होई फुले पले परिवार

कहे पवन के करे भरोसो जो अपनी कुल देवी के

सोने चांदी धन दोलत की खूब रहे भरमार

माह्पे कुलदेवी की किरपा होई फुले पले परिवार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।