मैया रानी दुःख में आँख मेरी रोई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया रानी दुःख में आँख मेरी रोई

जगा दे किस्मत पड़ सोई

तेरे बिन सहारा न कोई

मैया रानी दुःख में आँख मेरी रोई

जिस जननी ने जन्म दिया था छोड़ गई वो अकेली

तुझको अपनी माता समज के शरण तेरे माँ लेली,

विपता मर पड़ की ढोई काटो सोक कर होई तेरे बिन सहारा न कोई

मैया रानी दुःख में आँख मेरी रोई

दुष्टों का संहार करे माँ भगती उभारण तू है,

तू देवी मैं नारी शक्ति प्रेम का कारण तू है

मेरी सुख निंद्रा खोई विघन की वेळ गई बोई

तेरे बिन सहारा ना कोई

मैया रानी दुःख में आँख मेरी रोई

जिनका कोई नहीं है जगत में उनका कोई ठिकाना

द्वार तेरे पे बेठा कमल सिंह दोहराए ये गाना

भवन की राहे है टोही आत्मा भगती ने मोहि

तेरे बिन सहारा न कोई

मैया रानी दुःख में आँख मेरी रोई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।