ओ कान्हा रे कहा जाके छुपा रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओ कान्हा रे कहा जाके छुपा रे,

तेरे बिना ओ कान्हा मन मेरा लागे न

तू नही तो कुछ भी नही रे

ओ कान्हा रे कहा जाके छुपा रे,

तेरी राहो में पलके बिछाए,

तेरी मूरत को मन में वसाए

रस्ता तेरा देखे हम तेरे बिना रोये मन

अब तो आके दर्शन दे,

तेरी बंसी से मन मेरा डोले

रेह रेह कर ये दिल मुझसे बोले

मेर कान्हा आएगा मुझसे प्रीत लगाये गा

तू न माने बात मेरी रे

ओ कान्हा रे कहा जाके छुपा रे,

काहे हम को नजर तू न आये

काहे नैनो को इतना तरसाए

भगतो के तू मन की सुन हम को लागे तेरी धुन

अब तो मेरा धीर छुटे रे

ओ कान्हा रे कहा जाके छुपा रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।