इस धरा का इस धरा पे सब धरा रह जायेगा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इस धरा का इस धरा पे,

सब धरा रह जायेगा,

भज गोविन्दम् मूढ़मते,

हरि सुमिरन काम ही आयेगा,

इस धरा का -------------

झूठे बंधन झूठे रिश्ते,

झूठी माया नगरी में,

साँस टूटी सब रिश्ता टूटा,

कोई काम न आयेगा,

इस धरा का---- ---------

पंचतत्व की कंचन काया,

मिट्टी होनी है इकदिन,

मुट्ठी बांधे आया जग में,

तू हाँथ पसारे जायेगा,

इस धरा का-------------

हरि नाम कलिकाल कल्पतरु,

भर ले झोली सुमिरन से,

चार लाखि चौरासी भव से,

बस सुमिरन पार लगायेगा,

इस धरा का--------------

रचना आभार: ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।