गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अपना दहिया तू उतार गोरी ना जा जमुना पार

गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर

अपना दहिया तू उतार...

कल मै गयी थी सखी बेचन दहिया

मिला वही चोर मेरी रोक दिया रहिया

करने लगा ओ तकरार मांगे दहिया तो उतार

गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर

अपना दहिया तू उतार गोरी ना जा जमुना पार

गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर

अपना दहिया तू उतार...

नरम कलाई मेरी ऐसे मरोड़ी

मार चीख सखी मै तो पड़ी रो री

ताकि मेरा हो श्रृंगार मै तू उससे हुयी लाचार

गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर

अपना दहिया तू उतार गोरी ना जा जमुना पार

गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर

अपना दहिया तू उतार...

मुखड़े पे भोलापन हाथ में बासुरिया

कर गया जादू मो पे नन्द का सांवरिया

करके बाते ओ हजार दहिया लेना ओ उतार

गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर

अपना दहिया तू उतार गोरी ना जा जमुना पार

गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर

अपना दहिया तू उतार...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।