कितना प्यारा दरबार सजा है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कितना प्यारा दरबार सजा है

कितना सौणा दरबार सजा है

जी करे देखता रहू

तू है दाता तू है दानी तू है लखदातारी

तेरे दर पर बाबा मेरी मिटती विपदा सारी

कितना प्यारा दरबार सजा है

जी करे देखता रहू

फूलों के गजरों से सजी हुई झाँकी

कानो में कुण्डल है तेरी अदा बांकि

साँवल सा मुखड़ा है चितवन है प्यारी

देख तेरे रुप को में जाऊं बलिहारी

कितना सुन्दर कितना प्यारा

मेरा बाबा सबसे न्यारा

तेरे दर पे जो आ जाए पाए खुसिया सारी

तेरे दर्शन करने से ही मिटती चिंता सारी

कितना प्यारा दरबार सजा है जी करे देखता रहू

खाटू के मन्दिर की शोभा है न्यारी दर्शन को आते है लाखों नर नारी

मंदिर में भक्तो का लगता है तांता

"लाला" कि आँखो को तेरा दर्श भाता

मेरे मन को है लूभाता

तेरे दर पे दोड़ा आता

तेरे द्वार पे आने से मेरी मिटती है लाचारी

तेरे दर पे बाबा मेरी झोली भरती सारी

कितना प्यारा दरबार सजा है जी करे देखता रहू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।