ये साँसे ये धड़कन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये साँसे ये धड़कन मेरे श्याम की हुई मेरे श्याम की हुई

मिलने को बाबा श्याम जी जिया बेकरार है

जीना तुम्हारे बिन तो मुझे न ग्वार है

मैं लाख चाहू दाता तुझे भूल ता नही

प्यासी निगाहों को तेरा इन्तजार है

ये साँसे ये धड़कन

जब से नजर मिली न खबर आप की मिली

मुझको सजा ये कैसी तेरे प्यार की मिली

विरहा में तेरे मेरा जियरा बड़ा उदास

मुझको तो बस ललक तेरे दीदार की लगी

ये साँसे ये धड़कन

ऐसे सताओ न दर्शन दिखाओ तो सही

आखिर तुम्हारा हु मुझको रुलाओ तो नही

मैं तरसु तेरे प्यार को ठोकर मारू संसार को

सब झूठे रिश्ते छोड़ के मैं ध्याऊ कृष्ण मुरार को

ये साँसे ये धड़कन

तेरी जुदाई में आंसू बहाता हु सदा

तुझको मनाता हु तुझको बुलाता हु सदा

अब सारे बंधन तोड़ के

मैं सारी रस्मे तोड़ के ये हर्ष शरण में आ गया दुनिया से नाता तोड़ के

ये साँसे ये धड़कन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।