दीन बंधू दीनानाथ मोरी सुध लीजिये

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॥ पावन पाठ ॥

दीन बंधू दीनानाथ मोरी सुध लीजिये

दीनो के दयालु दाता मोपे दया कीजिये

भाई नहीं बन्धु नाही कुटुंब कबीलों नाही

ऐसो कोई मित्र नाही जासे कछु लीजिये

दीन बंधू दीनानाथ

खेती नहीं बाडी नाही बिणज व्यापार नहीं

ऐसो कोई सेठ नहीं जासे कछु लीजिये

दीन बंधू दीनानाथ

सोने को सुवइयो नाही रुपे को रुप्यो नाही

कोड़ी में तो पास नाही कहो केसे कीजिये

दीन बंधू दीनानाथ

कहता मलुकदास छोड़ दे परायी आस

सांचो तेरो एक नाम और किसका लीजिये

दीन बंधू दीनानाथ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।