दर दर न भटका संवारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दर दर न भटका संवारे,

पार लगा दो नैया मेरी बीच भावर अटका

दर दर न भटका संवारे,

भाई बंधू कुटंब कबीले देखे लिए मैंने सारे,

वो क्या मुझको देंगे सहारा जो किसमत के मारे,

जिसका हाथ पकड़ना चाहा,

उसने ही झटका

दर दर न भटका संवारे,

जिस जिस दर मैंने हाथ बडाया सब ने ही ठुकाराया,

इसीलिए सब छोड़ जमाना तेरा दर पे आया ,

जिस से आस लगाई मैंने आँखों में खटका

दर दर न भटका संवारे,

तुम हो जगत के मालिक बाबा तुम से क्या शरमाना

बाबा एसी करो किरपा जो देखे सारा ज़माना

कहे मनीष निकालो फंदा गले मेरे अटका

दर दर न भटका संवारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।