मोहे पनघट पे नन्द लाल छेड़ गेयो रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोहे पनघट पे नन्द लाल छेड़ गेयो रे

मोरी नाजुक कलईया मरोड़ गेयो रे,

मोहे पनघट पे नन्द लाल छेड़ गेयो रे

कंकरी मोहे मारी गगरियाँ फोड़ डाली,

मोरी सारी अनारी भिगोये गयो रे,

मोहे पनघट पे नन्द लाल छेड़ गेयो रे

नैनो से जादू किया जियरा मोह लिया

मोरा घुंगटा नजरियों से तोड़ गयो रे

मोहे पनघट पे नन्द लाल छेड़ गेयो रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।