राम जैसा नगीना नही

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

राम जैसा नगीना नही सारे जग की बजरियां में

नील मणि ही जडाऊ गी अपने मन की मुदरिया में

राम का नाम प्यारा लगे रसना पे बिठाऊ गी मैं

मैं तो मूरत बसाऊ गी नैनो की पुतरियां में

राम जैसा नगीना नही सारे जग की बजरियां में

है झूठे सभी रिश्ते और झूठे सभी नाते

दूजा रंग न चडाऊ गी अपनी शामल चदारियां पे

राम जैसा नगीना नही सारे जग की बजरियां में

जल्दी से यत्न करके राघव को रिझाना है,

कुछ दिन ही तो रहना है काया की कुतरियां में

राम जैसा नगीना नही सारे जग की बजरियां में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।