ढूंडा सारा गाओ हो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये कुञ्ज गली सकरी सकरी छिप गया कहा,

पकड़ी पकड़ी तेरी चोरी श्याम हो

ढूंडा सारा गाओ हो

ना श्याम मिले ना बांसुरियां की मीठी तान हो

ढूंडा सारा गाओ हो

तुझे पल पल चाहू तेरी शरण में आऊ,

जो दिखे श्याम तो पगली हो जाऊ,

तुझपे अर्पण मेरे तन मन दिखे मुझको दर्पण दर्पण तेरी सूरत श्याम हो,

ढूंडा सारा गाओ हो

चाहे याहा भी जाऊ

तुझमे खो जाऊ,

मेरे नटखट मोहन तुझे भूल न पाऊ,

अब दूर करो मेरी उल्जन पाउ तुमको हर जन्म जन्म

मेरे घनश्याम हो

ढूंडा सारा गाओ हो

ना श्याम मिले ना बांसुरियां की मीठी तान हो

ढूंडा सारा गाओ हो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।