मेरे भोले का रूप

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जटा में गंगा को जिस ने है बाँध लिया

सोने की लंका का रावन को दान दिया

हाथो में तिरशूल है पकड़ा गल नागो की माला है,

मेरे भोले का रूप निराला है,

देवी देवते भुत चुडेला मोह माया एहदे हथ दियां खेला,

पिंडे अपने भस्म रमाये ना गोरा न काला है,

मेरे भोले का रूप निराला है,

नील कंठ केलाश पति है शिव की मेरे पार्वती है,

तीन लोक के स्वामी मेरे

तीन ही नेत्र वाला है

मेरे भोले का रूप निराला है,

राजू मंगदा एहो दुआवा पूजे तेनु विच जगरावा

जिस ने तेरी महिमा गाई सोनी तो किस्मत वाला है

मेरे भोले का रूप निराला है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।