मैं पागल हो गयी रे खोलीवाले के प्यार में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं पागल हो गयी रे खोलीवाले के प्यार में

मैं पागल, मैं पागल, मैं पागल हो गयी हाय हाय

खोलीवाले बाबाजी की आयी दौज निराली

पावन धाम मिलकपुर भूमि खुशिया देने वाली

ऊंचे पर्वत के ऊपर देखो है खोली काली

दर्शन करने मनमोहन के सखियों के संग चली

मैं भगति टोह गयी रे खोलीवाले के प्यार में

बाबा के मंदिर में जाके मैंने ज्योत जलाई

जोहड़ छाटी भरी जलहरी चीटी फेर जिमाई

बाबाजी की गुफा निराली पैड़ी चढ़ के आयी

नीले घोड़े पे बाबाजी देंगे मनै दिखाई

मैं सुद बुद खो गयी रे खोलीवाले के प्यार में

बाबाजी का नीला घोडा देखा अजब निराला

बाबा मोहन जिसके ऊपर रूप था भोला भाला

लम्बी लम्बी लटा सुनहरी गल वैजन्ती माला

दर्शन करके मैं खुश हो गयी जादू सा कर डाला

सूरत मन मोह गयी रे खोलीवाले के प्यार में

हाथ जोड़ प्रणाम करी श्रद्धा से शीश झुकाया

बाबाजी के चरणों में मैं लम्बी लेटी जाके

सिर के ऊपर हाथ फेर दिया मंद मंद मुस्काके

प्रियंका हरेराम बैसले मगन हुए गुण गाके

धूणे पे सो गयी रे खोलीवाले के प्यार में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।