हे मईया है तू ही बस मेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दुनिया में सपना है सब कुछ हर माया का डेरा,

हे मईया है तू ही बस मेरी

सुख का सूरज ढलता जाए

दुःख घनघोर अँधेरा

सुख तू है दुःख मेरा जीवन

यह जग रेहन बसेरा

हे मईया है तू ही बस मेरी

सत्ये सभा में सिमट गया है

झूठे कपट का घेरा,

आये पड़ो हे खप्पर वाली हिरदये पुकारे मेरा

हे मईया है तू ही बस मेरी

कौन सुनेगा दुखियो का दुःख हे आंबे बिन तेरे,

काहे दिनेश हे महारानी सोहू जी लगाये नारा

हे मईया है तू ही बस मेरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।