तेरा रूप सजा के नैयन में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरा रूप सजा के नैयन में बेठी हूँ वृंदावन में

लट प्रीत की एसी लागी तुझे ढूंड रही कण कण,

इक पग में राह निहारे तेरी श्याम से

कोई जाके केह दे निर्मोही घनश्याम से,

तेरे बिन कुछ न भावे पल पल तेरी याद सतावे

दिल वेचैनी में धडके शिंगार बी रास न आवे

सब लोग मारे है ताना अपना भी लागे है बेगाना

बस एसी लगन है लागी तेरे नाम से

कोई जाके केह दे निर्मोही घनश्याम से,

इक बात समज न पाऊ किस को कैसे बतलाऊ

सपने में जब तुझे देखू अपने से क्यों शरमाऊ,

जी करता है सब को बता दू तू छलियाँ है कर गया जादू

बदनाम किया है मुझको शरेआम रे,

कोई जाके केह दे निर्मोही घनश्याम से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।