पाइयां तेरे दर तो माँ, रेह्मतान हज़ारां, शुकर गुज़ारां मैया शुकर गुज़ारां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पाइयां तेरे दर तो माँ, रेह्मतान हज़ारां, शुकर गुज़ारां मैया शुकर गुज़ारां॥

रेह्मतान नूं वेख अखां , हंस पयियाँ रोंदियाँ॥

ऐना किती मेहर मैनू सिफ्तान न होंदियाँ

बार बार बोलन मेरे, दिल दियां तारां

शुकर गुज़ारां तेरा शुकर गुज़ारां

कौडियाँ डा मूल नहीं सी, हीरयाँ दा पै गया

जिदो दा मैं दाती तेरे दर उते आ गया

क्यूं न मैया तेरे उते, मैं तन मन वारां

शुकर गुज़ारां तेरा शुकर गुज़ारां

दर दर रुलदा सी, किसे न संभाल्या

तुसां किती मेहर मैनू चरणां च ला लया

सुख देवे दुःख देवे, झोली विच पा लवां

दुखां नु वि दातिये मैं, सुखां नाळ सह लवां

पाइयां तेरे दर तो माँ, रेह्मतान हज़ारां, शुकर गुज़ारां मैया शुकर गुज़ारां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।