श्याम दीवानी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इश्क़ में तेरे सब कुछ खोया ओ मैंने कृष्णा कन्हाई

लेकिन तेरे इश्क़ ने मेरी जग में हंसी उड़ाई

अब तू अपना ले सांवरिया मेरी काहे की रुस्वाई

तेरी दीवानी हो गयी यूँ जग से बेगानी हो गयी यूँ

तेरे प्रेम में पागल हो गई मुझको ऐसा लगदा ऐ

श्याम जहाँ देखो अब तो बस तेरा चेहरा दीखता ऐ

तेरी दीवानी हो गई श्याम दीवानी हो गई ............

मेरी सांसों में धड़कन में तेरी प्रीत समाई

तेरी प्रीत में खोकर मैं तो जग से हुई पराई

अब तेरे सिवा दिलदार मुझे सच में कोई न जचदा ऐ

तेरी दीवानी हो गई श्याम दीवानी हो गई ............

रंग में तेरे रंग कर बैठी हूँ तेरी खातिर सज कर बैठी हूँ

क्यों बेपरवाह बनकर मुझसे यार सांवरे रहता है

तेरी दीवानी हो गई श्याम दीवानी हो गई ............

तू उल्फत है यार है मेरा तू चाहत दिलदार है मेरा

तू ही तो ज़िंदगानी मेरी तू रग रग में बसदा है

श्याम जहा देखू अब तो बी अस तेरा चेहरा दिखदा ऐ

तेरी दीवानी हो गई मैं तो दीवानी हो गई ............

हर पल तेरी राह निहारें शर्मा तुझको कब से पुकारें

तुझसे मिलने की खातिर बस तन में सांस ये चलता ऐ

श्याम जहा देखू अब तो बी अस तेरा चेहरा दिखदा ऐ

तेरी दीवानी हो गई श्याम दीवानी हो गई ............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।