तेरे दर्श की प्यासी हैं अखियाँ, दे दे मैया दीदार हमें

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर्श की प्यासी हैं अखियाँ, दे दे मैया दीदार हमें॥

इक बार तू अपने मुख से मां, अपना कह के पुकार हमें॥

जीवन की नाव पुरानी है, मीलों तक गहरा पानी है

इस जग के भवसागर से मां, आ कर के लगा दे पार हमें

तेरे दर्श की प्यासी हैं अखियाँ, दे दे मैया दीदार हमें

इक बार तू अपने मुख से मां, अपना कह के पुकार हमें

तेरा ही एक सहारा है,

बिन तेरे कौन हमारा है,

मां तू भाई जो अगर ठुकरा देगी, फिर कौन करगे प्यार हमें

तेरे दर्श की प्यासी हैं अखियाँ, दे दे मैया दीदार हमें

इक बार तू अपने मुख से मां, अपना कह के पुकार हमें

इतना सा दे वरदान हमें, भक्ति का दे दे दान हमें

सोने चांदी के दौलत के, क्या करने हैं भण्डार हमें

तेरे दर्श की प्यासी हैं अखियाँ, दे दे मैया दीदार हमें

इक बार तू अपने मुख से मां, अपना कह के पुकार हमें

तेरे दर्श की प्यासी हैं अखियाँ, दे दे मैया दीदार हमें॥

इक बार तू अपने मुख से मां, अपना कह के पुकार हमें॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।