घर से बेघर हो गया दीवाना घर से चल दियां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

घर से बेघर हो गया दीवाना घर से चल दियां

श्यामा श्यामा केहते केहते गिरता पड़ता चल दियां

घर से बेघर हो गया दीवाना घर से चल दियां

लोग पत्थर थे उठा ते और धक्का मारते

उसकी मज़बूरी लाचारी ये सभी दुध्कार ते

जो भी रिश्ते नाते है अपनों ने मुह मोड़ लिया

घर से बेघर हो गया दीवाना घर से चल दियां

पैसे की पहचान याहा पर पैसे बिन न यार है

हो गे अपने बेगाने मतलब का ये संसार है

मुख्लसी ये आज देखो सब ने रिश्ता तोड़ दिया

घर से बेघर हो गया दीवाना घर से चल दियां

रोता चिलाता था तू नगरी में वो आ गया

देखते ही सांवरिया के प्रेम मन में छा गया

संवारे तेरी किरपा ने राजा उसे बना दिया

घर से बेघर हो गया दीवाना घर से चल दियां

हारे का तू इक सहारा केहती दुनिया सारी है

नागर की भी सुनलो कन्हियाँ तेरे दर का भिखारी है

जो भी तेरी शरण में आया मुह माँगा वर दे दिया

घर से बेघर हो गया दीवाना घर से चल दियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।