एह चूहे राजा गणेशा से मेरी अब दोस्ती तू करा दे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

एह चूहे राजा गणेशा से मेरी अब दोस्ती तू करा दे

तुझको खिलाऊ गी मेवे लड्डू इक बार उन से मिलवा दे

एह चूहे राजा गणेशा से मेरी अब दोस्ती तू करा दे

तुम हो गणेशा के सब से करीबी मेरे सखा हो मेरे खुश नसीबी

इक बार जो दोस्त बन जाये मेरे फिर मिल सकू गी कभी भी कही भी

अब जाके जल्दी से ले आओ बिठा के संग मुझे भी घुमा दे

एह चूहे राजा गणेशा से मेरी अब दोस्ती तू करा दे

इक बार तू देवा हमारे हर कोई बेठा है घर को सवारे

मंदिर हो सडके हो या गलियारे चारो तरफ है तेरे जयकारे

मुझको सताना जल्दी से आना देर न अब तू लगा रे

एह चूहे राजा गणेशा से मेरी अब दोस्ती तू करा दे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।