साडे घर आओ गुरु जी साडे घर आओ

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

साडे घर आओ गुरु जी साडे घर आओ

आओ जी गुरु जी साड़ी कुटियाँ च आओ

जेह्डा रुखा सुखा बनेया ओहदा भोग लगाओ जी

आओ जी गुरु जी साड़ी कुटियाँ च आओ

कुटियाँ च आओ गे ते पलका विछावा गी,

अपने हंजू नाल चरण धोआवा गी

अपनी वाशना नाल साडा घर महकाओ जी

आओ जी गुरु जी साड़ी कुटियाँ च आओ

जदों तुसी आओ गे ते संगत भी आये गी,

कितियाँ पाक अपने कर्म घटाए गी

अपनी किरपा दी छाया विच सहनु भी बिठाओ जी

आओ जी गुरु जी साड़ी कुटियाँ च आओ

वेख वेख तहानु मैं ते बल बल जावा गी ,

तन मन तुहाडे उते अपना मैं वारा गी

अपनी रेहमता दा मीह सारी संगत ते बरसाओ जी

आओ जी गुरु जी साड़ी कुटियाँ च आओ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।