तू आ जा माँ, बड़े चिर तो, लगी ऐ आस दर्शन दी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तू आ जा माँ, बड़े चिर तो, लगी ऐ आस दर्शन दी॥

हैं अखियाँ नू वी हर वेले, लगी ऐ आस दर्शन दी॥

जो तेरा प्यार मंगदे ने, ओना नूं प्यार मिलदा ऐ

मैं तेरा दर्श मंगदा हां, सुनों फरियाद निर्धन दी

तू आ जा माँ, बड़े चिर तो, लगी ऐ आस दर्शन दी

तेरी ममता दे सागर चों, मिले अमृत दे दो कतरे

मेरी किस्मत वी बन जाए, मिले जे धूल चरणन की

तू आ जा माँ, बड़े चिर तो, लगी ऐ आस दर्शन दी

मेरे जो नैन हैं दाती, कई जन्मां दे प्यासे ने

करम कर दे जे मेरे ते, ता मिट जाये प्यास मेरे मन की

तू आ जा माँ, बड़े चिर तो, लगी ऐ आस दर्शन दी

लगन दर्शन दी लै के माँ, मैं तेरे दर ते आयां हाँ

न खाली दास नू मोड़ी, ऐ विनती है तेरे जन दी

तू आ जा माँ, बड़े चिर तो, लगी ऐ आस दर्शन दी

तू आ जा माँ, बड़े चिर तो लगी ऐ आस दर्शन दी

हैं अखियाँ नू वी हर वेले, लगी ऐ आस दर्शन दी

तू आ जा माँ, बड़े चिर तो, लगी ऐ आस दर्शन दी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।