मेरे मन मंदिर में माँ , सुबह शाम तुम्हें देखूं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन मंदिर में माँ , सुबह शाम तुम्हें देखूं,

कण कण में देखूं, हर पल में तुम्हें देखूं,

मेरे मन मंदिर में माँ , सुबह शाम तुम्हें देखूं,

मेरे नेनो में बस जाओ मेरे मन में समां जाओ॥

मेरे रोम रोम माँ मैं सुबह शाम तुम्हे देखू

यह तन भी तुम्हारा है,मेरा मन भी तुम्हारा है,॥

हर कण कण में माँ ,सुबह शाम तुम्हे देखू,

यह रिश्ता पुराना है, कहीं टूट न जय माँ॥

दिल की हर धड़कन में, सुबह शाम तुम्हें देखूं,

मेरी यादों में बस जाओ, मेरे प्राणों में रम जाओ॥

मेरे स्वास स्वास में माँ, सुबह शाम तुम्हें देखूं,

मेरे मन मंदिर में माँ, सुबह शाम तुम्हें देखूं॥

कण कण मेंग देखूं, हर पल में तुम्हें देखूं,

मेरे मन मंदिर में माँ, सुबह शाम तुम्हें देखूं॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।