बाबोसा के मंदिर में भक्त जो भी आता है

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॥ पावन पाठ ॥

बाबोसा के मंदिर में ,भक्त जो भी आता है

बाबोसा से रिश्ता वो , पल में जोड़ जाता है

धाम ये चुरू का जग में निराला

जाये जो भक्त वो , है मतवाला

फिर वो चुरु हर बार आता है

बाबोसा के मंदिर में ....

घर घर मे सेवा , पूजा तुम्हारी

तुमसे ही रोशन , दुनिया हमारी

मन मेरा भक्ति में , खो जाता है

बाबोसा के मंदिर में ....

भक्तो ने जब भी , इनको पुकारा

पल में ही आकर , दिया सहारा

भक्तो की भक्ति से ,रीझ जाता है

बाबोसा के मंदिर में ....

कलयुग के देव है , बाबोसा हमारे

दिलबर ये भक्तो की ,नैया को तारे

इनकी शरण मे जो जाता है

बाबोसा के मंदिर में ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।