आज हरी आये विदुर घर पावना

जया किशोरी जी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आज हरी आये, विदुर घर पावना॥

आज हरी आये, विदुर घर पावना॥

विदुर नहीं घर मैं विदुरानी ,आवत देख सारंग प्राणी ।

फूली अंग समावे न चिंता ॥ ,भोजन कंहा जिमावना ॥

केला बहुत प्रेम से लायीं, गिरी गिरी सब देत गिराई ।

छिलका देत श्याम मुख मांही ॥,लगे बहुत सुहावना,

इतने में विदुरजी घर आये ,खरे खोटे वचन सुनाये ।

छिलका देत श्याम मुख मांही ॥,कँहा गवांई भावना,

केला लीन्ह विदुर हाथ मांही,गिरी देत गिरधर मुख मांही ।

कहे कृष्ण जी सुनो विदुर जी ॥,वो स्वाद नहीं आवना,

बासी कूसी रूखी सूखी,हम तो विदुर जी प्रेम के भूखे ।

शम्भू सखी धन्य धन्य विदुरानी ॥,भक्तन मान बढावना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।