तेरे कदमो में माँ मिल गई जब जगह

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे कदमो में माँ मिल गई जब जगह,

और कुछ मांगे ने की जरूत नही,

तेरी सूरत वसी दोनों नैनो में माँ

और कुछ देखने की जरूरत नही

तेरे कदमो में माँ मिल गई जब जगह,

और कुछ मांगे ने की जरूत नही,

जब से सिर पर रखा तूने माँ हाथ है

हो गई पूरी माँ मेरी हर बात है

इक दर से ही जब जो भी चाहा मिला

दर बदर झाँकने की जरूत नही

तेरे कदमो में माँ मिल गई जब जगह,

और कुछ मांगे ने की जरूत नही,

गम की धुप में माँ जब ये काया जली

बन के छाया तू माँ मेरे संग संग चली,

ये निगाहें टिकी तेरी सूरत पे माँ,

तुझसे सुंदर जमाने में मूरत नही

तेरे कदमो में माँ मिल गई जब जगह,

और कुछ मांगे ने की जरूत नही,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।