माँ के दर्शन करा लंगुरियां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ के दर्शन करा लंगुरियां अब के एरोप्लेन से

जल्दी से जम्मू पोंछादे देर लगे की ट्रेन से

ना गाडी ना बंगला माँगा ना गेहने न टीवी

गई बैल गाडी से भी जब घर में थी गरीबी

अब तू बिज्नास मन है बिज्नास क्लास की टिकेट मन्ग्वाइयो

कंजूसी मत करियो जो मैं कहू वो करता जाइयो,

अपने पास है सब कुछ तो अब तो जगदम्बे की दें से,

जल्दी से जम्मू पोंछादे देर लगे की ट्रेन से

जम्मू से कटरे तक पोहंचे शान से मेरी सवारी

मर्सडीस करियो लांगुरिया या कर लियो फरारी

कटरे से हेलिकोपटर में सांझी शत जाउंगी

सांझी शत से नाचती गाती भवनों तक जाउंगी,

लिखले दिल के कागज पे ये शर्ते प्रेम के पैन से,

जल्दी से जम्मू पोंछादे देर लगे की ट्रेन से

कब से ममंत मान रखी है अब कर वा दे पूरी

ना टाइम की टेंशन है न मन की मज़बूरी,

लिखवाले लोकेश से लैटर ये है माँ का दुलारा,

माँ से मिलने का नंबर जल्दी आएगा हमारा,

दर्श करेगे महारानी के बेठ गुफा में चैन से

जल्दी से जम्मू पोंछादे देर लगे की ट्रेन से

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।