आव सखी देखा गणपत घूमे है

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

आव सखी देखा गणपत घूमे है

लम्बी सूँड मतवाला जी

घृत सिन्दुर थारे मस्तक सोहे देवा,

शिव-शक्ति का बाला हो गणपत, देव भया मतवाला जी

राजा भी सुमिरे थाने, परजा भी सुमिरे है,

सुमिरे गा जोगी जटावाला जी

उठ सँवारी, व्यापारी, थाने सुमिरे देवा,

रिद्धि सिद्धि देवणवाला ओ गणपत, देव भया मतवाला जी

आव सखी देखा गणपत घूमे है,

लम्बी सूँड मतवाला जी

ओढ़ण पीत पीतम्बर सोहे देवा,

गल फूलंडा री फूल मालाजी,

सात सखी रल मंगल गावे देवा,

बुद्धि को देवण वाला ओ गणपत, देव भया मतवाला जी

आव सखी देखा गणपत घूमे है,

लम्बी सूँड मतवाला जी

नात गुलाब, मिल्या गुरु पूरा म्हाने,

हृदय में करियो उजियाला जी,

भानीनाथ, शरण सतगुरु की देवा,

खोल्या भ्रम रा ताला ओ गणपत, देव भया मतवाला जी

आव सखी देखा गणपत घूमे है,

लम्बी सूँड मतवाला जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।