॥ पावन पाठ ॥
मंगल तू करता दुखड़े तू हरता,
याहा पेहले तुझे ध्याये जो,
सिद्ध काज तू ही उस के है करता तुझे मन में वसाये जो
लगाये जैकारा बोलो जय हो गणपति बाबा,
शिव से वरदान मिला है तुझे जो भी ध्याए गा
मिटे गी सारी वाधाये ऐसा वर पायेगा
पायेगा किनारा बोलो जय हो गणपति बाबा,
जिस पे तू कर देता किरपा गले से लगाता है
दूर दुःख सब हो जाता है भाग्य बन जाता है,
मिलता सहारा बोलो जय हो गणपति भप्पा,
बोलो जय हो गणपति बाबा,
शुद्ध मन से वंदन तेरा याहा जो भी करता है
उसकी वाधा और संकट सब पल में तू हरता है,
सही को है तारा बोलो जय हो गणपति भप्पा,