दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अखियाँ प्यासी रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अखियाँ प्यासी रे,

मन मंदिर की ज्योत जगा दो घट घट वासी रे,

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अखियाँ प्यासी रे,

मंदिर मंदिर मूरत तेरी फिर भी न दिखे सूरत तेरी ,

युग बीते न आई मिल्न की पूरणमाशी रे

दर्शन दो घनश्याम

द्वार दया का तू जब खोले पंचम स्वर में गूंगा बोले,

अँधा देखे लंगड़ा चल चल पोंछे काशी रे

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अखियाँ प्यासी रे,

पानी पी कर प्यास बुजाऊ नैनं को कैसे समजाऊ

आँख मचोलो छोड़ो अब तो मन के हासी रे,

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अखियाँ प्यासी रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।