मन जुडेया सतगुरु नाल नि मैं सद के

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मन जुडेया सतगुरु नाल नि मैं सद के

नि मैं सद के

हर वेले नि हर हाल नि मैं सद के

मन जुडेया सतगुरु नाल नि मैं सद के

एह्दर वेखा ओह्दर वेखा नीचे उपर वेखा

पूरब पशिम उतर दशिन ओहियो दिसदा जिह्दर वेखा,

साडा रिश्ता बड़ा कमाल

नि मैं सद के

मैं रोवा ते रोंदी अडियो असा ते ख़ुशी मनाउंदे अडियो,

दुःख हॉवे चाहे सुख हॉवे सतगुरु रिश्ता खूब निभाउंदे अडियो,

लज रखदा एह लजपाल नि मैं सद के

एहियो मंगा एहियो चावा शांत रोज दुआवा,

सोहना मेरे सामने हॉवे मैं जदों दुनिया तो जावा,

पूरा हो जाए मेरा सवाल नि मैं सद के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।