बाँसुरी बजाए आज रंग से मुरारी

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बाँसुरी बजाए आज रंग से मुरारी

शिव समाधि भूल गये, ऋषि मुनि की नारी ।

वेद पढ़त ब्रह्मा भूले, भूले ब्रम्हचारी ॥

बाँसुरी बजाए आज...

रंभा सम ताल चूकी, भूली नृत्यकारी ।

हो जमुना जल उलटी गयो, शोभा आज भारी ॥

बाँसुरी बजाए आज...

वृंदावन बंसी बाजी, तीन लोक प्यारी ।

ग्वाल बाल मगन भए, ब्रज की सब नारी ॥

बाँसुरी बजाए आज...

सुंदर श्याम मोहिनी मूरत, नटवर वपु धारी ।

सुर को प्रभु मदन मोहन, चरणन बलिहारी ॥

बाँसुरी बजाए आज...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।