भूत नाथ के दीवाने मस्ती में रेहते है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

धन दोलत वाले तो सदा बस्ती में रहते है

भूत नाथ के दीवाने मस्ती में रेहते है

भुत नाथ के मस्तानो की हर इक बात निराली

करे मौज हर रोज है होती होली और दीवाली,

मस्त सदा खुश हाल मेहंगी सस्ती में रेहते है

भूत नाथ के दीवाने मस्ती में रेहते है

भुत नाथ अपने भगतो की दूर करे हर टेंशन

शरण में रहने वालो की बंध जांदी याहा पे टेंशन

मौज उडा के जो इनकी कश्ती में रेहते है

भूत नाथ के दीवाने मस्ती में रेहते है

भुत नाथ भंडारी भोला भगतो के रखवाले,

चरण शरण में जो भी आता उसको सदा संभाले,

पंकज प्रेमी इक के सर परस्ती में रेहते है

भूत नाथ के दीवाने मस्ती में रेहते है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।