प्रभु हम पे कृपा करना

हरी ॐ शरण
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु हम पे कृपा करना,

प्रभु हम पे दया करना ।

बैकुंठ तो यही है, हृदय में रहा करना ॥

गूंजेगे राग बन कर वीणा की तार बनके,

प्रगटोगे नाथ मेरे ह्रदय में प्यार बनके ।

हर रागिनी की धुन पर स्वर बन कर उठा करना,

बैकुंठ तो यही है, हृदय में रहा करना ॥

नाचेंगे मोर बनकर हे श्याम तेरे द्वारे,

घनश्याम छाए रहना बनकर के मेघ कारे ।

अमृत की धार बनकर प्यासों पे दया करना,

बैकुंठ तो यही है, हृदय में रहा करना ॥

तेरे वियोग में हम, दिन रात हैं उदासी,

अपनी शरण में लेलो हे नाथ ब्रज के वासी ।

तुम सो हम शब्द बन कर प्राणों में रमा करना,

बैकुंठ तो यही है, हृदय में रहा करना ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।