तुम कब आओ गे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हमें भी न पाओगे तुम नही आओगे,

बोलो न श्याम मेरे तुम कब आओ गे

जाने से पेहले कर लो आने का वादा

जा कर बदल मत देना अपना इरादा

आने का वाधा कर के बुल तू न जावे

तुम कब आओ गे

हम को भी साथ लेले ओ जाने वाले

सब कुछ किया है हम ने तेरे हवाले

हम भी चलेगे साथ यहाँ यहाँ जाओगे

तुम कब आओ गे

सुना सुना ब्रिज लागे गोकुल का धाम रे

यमुना का तट सुना कदम की छाव रे,

वृंदावन में आके कब बांसुरी बजाओ गे

तुम कब आओ गे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।