जब से गये मेरे मोहन परदेश में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जब से गये मेरे मोहन परदेश में।

तब से रहती हूँ पगली के वेश में॥

कभी नींद न आये,कभी नैना भर आये।

क्या मानू समझ लीजिए,

मेरे कान्हा को मुझसे मिला दीजिये।

वो वंशी की धुन फिर सुना दीजिये॥

गालियां ये हो गई सुनी,सुना अँगनवा,

कान्हा नही है आते,आवे सपनवा।

कभी वंशी बजाए,कभी माखन चुराए॥

बस यादे समझ लीजिए,

मेरे कान्हा को मुझसे मिला दीजिये।

वो वंशी की धुन फिर सुना दिजीये॥

परसो की कहकर गए वर्षो लगायल

न ही वो खुद आये न संदेश आयल

मैं तो राह निहारूँ, कान्हा कान्हा पुकारूँ।

कोई मुझको मिला दीजिये

मेरे कान्हा को मुझसे मिला दीजिये।

वो वंशी की धुन फिर सुना दीजिये।।

जब से गये मेरे मोहन परदेश में..

तब से रहती हूँ........

लेखक व सिंगर

सचिन निगम टिकैतनगर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
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नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।