सतगुरु मैं तेरी पतंग

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॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय साईं ॐ जय साईं ॐ।

ॐ जय साईं ॐ जय साईं ॐ॥

साईं जी मै तेरी पतंग, सतगुरु मैं तेरी पतंग,

हवा विच उडदी जावांगी, हवा विच उडदी जावांगी।

साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी॥

तेरे चरना दी धूलि साईं माथे उते लावां,

करा मंगल साईंनाथ गुण तेरे गावां।

साईं भक्ति पतंग वाली डोर, अम्बरा विच उडदी फिरा॥

बड़ी मुश्किल दे नाल मिलेय मेनू तेरा दवारा है।

मेनू इको तेरा आसरा नाले तेरा ही सहारा है।

हुन तेरे ही भरोसे, हवा विच उडदी जावांगी,

साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी॥

ऐना चरना कमला नालो मेनू दूर हटावी ना।

इस झूठे जग दे अन्दर मेरा पेचा लाई ना।

जे कट गयी ता सतगुरु, फेर मैं लुट्टी जावांगी,

साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी॥

अज्ज मलेया बूहा आके मैं तेरे द्वार दा।

हाथ रख दे एक वारि तूं मेरे सर ते प्यार दा।

फिर जनम मरण दे गेडे तो मैं बच्दी जावांगी,

साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।