जींद मेरीये तू ऐवे न गबराया कर

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जींद मेरीये तू ऐवे न गबराया कर गुरु जी दा ध्यान लगाया कर,

जद कुछ भी नजर ना आवे ते नजारा उस वल घुमाया कर

जींद मेरीये जींद मेरीये

तू सब ते मेहरा करदा ऐ साडी भी आस पूजाए गा,

ओह सब दे संकट हरदा ऐ साडी विपदा वि मिटाएगा,

ओह सब दियां झोलिया भरदा ऐ सहनु फिर क्यों ठुकराए गा,

जींद मेरीये जींद मेरीये

भुलियाँ दी भुला माफ़ करे

गुण अवगुण चेते ल्यौन्दा नही

करदा न किसे नु शरमिंदा,

सुख देके कदे सुनंदा नही

जग तो न्यारा लज पाल वे ओ

हाथ फड के कदे छुदउन्दा नही

जींद मेरीये जींद मेरीये

जद याद करा साहिल उस नु

दिल विच इक नूर समा जौंदा

जदबंद करा पट अखियाँ दे दर्शन दी ज्योत जगा जौंदा,

अपनी संगता दे नाल किता होया अपना हर इक वचन निभा जांदा,

जींद मेरीये जींद मेरीये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।