कब से मेरे नैना तरस रहे मुलाक़ात के लिए

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

कब से मेरे नैना तरस रहे मुलाक़ात के लिए

आ जाओ गणपति मोरेया इक रात के लिए,

कब से मेरे नैना तरस रहे मुलाक़ात के लिए

हे विघन हरन लम्बोदर रिधि सीधी के सोहर,

चूहे पे आओ चढ़ कर सिर ऊपर मुकट पेहन कर

लड्डूवन का भोग बनाया है परशाद के लिए

आ जाओ गणपति मोरेया इक रात के लिए,

कब से मेरे नैना तरस रहे मुलाक़ात के लिए

है दर्शन की शुभ वेला मोसम भी है अलबेला,

भगतो का लगा है मेला आये है गुरु और चेला

बस इक झलक दिखला दो न मुराद के लिए

आ जाओ गणपति मोरेया इक रात के लिए,

कब से मेरे नैना तरस रहे मुलाक़ात के लिए

मिरदंग और ढोल भजा है फूलो से भवन सजा है

तू आजा कहा छिपा है दर्शन को अनाड़ी खड़ा है,

कुछ पल को दूर हटा दे अपनी याद के लिए

आ जाओ गणपति मोरेया इक रात के लिए,

कब से मेरे नैना तरस रहे मुलाक़ात के लिए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।