आज साडे वनेरे का बोले मेरे जोगी ने औना ता बोले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आज साडे वनेरे का बोले मेरे जोगी ने औना ता बोले

दिल विच मेरे जोगी वसदा

वेखा जिधर मेनू जोगी दिसदा,

मेरे रोम रोम विच जोगी वस् गया है

मेरे लू लू विच जोगी वस् गया है

ताहीयो हर सा उसदा ना बोले

हथ विचो डिग डिग जावे तकदी राह कद जोगी आवे

आज हवावा भी खुशियाँ मनाउंदिया ने

जिथो लंगा जोगी ओ हर राह बोले

आज साडे वनेरे का बोले मेरे जोगी ने औना ता बोले

रोट परशाद बना के रखया आसन बाबे दा लाके रखया

मेरे धरती ते पैर न लगदे ने नाले ढोल नगाड़े बजदे ने

मेनू चडेया मिल दा चाह भोले

आज साडे वनेरे का बोले मेरे जोगी ने औना ता बोले

पौनाहारी मेरे दिल दा जानी नाल राधे दे ओहदी सांझ पुरानी

ताहियो धीरज काका लिखदा ऐ जिहनू रूप जोगी दा दिसदा है

जिहदे बक्शे एब गुन्हा बोले

आज साडे वनेरे का बोले मेरे जोगी ने औना ता बोले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।