शिव जोगी मतवाला मेरा शिव जोगी मतवाला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बम लेहरी केहता है कोई कहता है डमरू वाला

दो पल ध्यान लगा के जिस ने जो माँगा दे डाला

कितना भोला भाला

शिव जोगी मतवाला मेरा शिव जोगी मतवाला

विश्व नाथ की महिमा जग में कोई समज न पाया

महादेव ही जाने कया है महादेव की माया

खुद कुटियाँ में रेहता है जिसने संसार बनाया

ना जाने केलाशी के मन को केलाश क्यों भाया

बाँट दिया अमृत देवो में पी लिया विष का प्याला कितना भोला भाला,

शिव जोगी मतवाला मेरा शिव जोगी मतवाला

तीनो लोको में शिव जैसा देखा न कोइ दानी

बसमा सुर जैसे पापी की बात भी शिव ने मानी

ना शिव सा सन्यासी कोई ना कोई ग्यानी ध्यानी

देदी दान सोने की लंका की न आना कानी

त्याग दिए रत्नों के गेहने पेहने सर्प की माला

शिव जोगी मतवाला मेरा शिव जोगी मतवाला

पुष्प विमान दिए देवो को की नंदी की सवारी

इक दिन गोरा बोली शिव से समजो बात हमारी

भोला भोला केह के तुम को ठग लेते पुजारी

कण आँखे खोलो गे हे बदम्भर धारी

ये भी न देखे भोला है कौन मांगने वाला कितना भोला बाला

शिव जोगी मतवाला मेरा शिव जोगी मतवाला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।