ग्यारस माता से मिलन कैसे होय

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ग्यारस माता से मिलन कैसे होय कि पांचों खिड़की बंद पड़ी।

पहली खिड़की खोलकर देखूं, कूड़ा-कचरा होय,

मुझमें इतनी अकल नहीं आई कि झाड़ू-बुहारा करती चलूं,

ग्यारस माता से...

दूजी खिड़की खोलकर देखूं, गंगा-जमुना बहे,

मुझमें इतनी अकल नहीं आई कि स्नान करके चलूं,

ग्यारस माता से...

तीजी खिड़की खोलकर देखूं, घोर अंधेरा होय,

मुझमें इतनी अकल नहीं आई कि दीया तो लगाती चलूं,

ग्यारस माता से...

चौथी खिड़की खोलकर देखूं, तुलसी क्यारा होय,

मुझमें इतनी अकल नहीं आई कि जल तो चढ़ाती चलूं,

ग्यारस माता से...

पांचवीं खिड़की खोलकर देखूं, सामू मंदिर होय,

मुझमें इतनी अकल नहीं आई कि पूजा-पाठ करती चलूं,

ग्यारस माता से...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।