तुम्हे मालुम नही कितना सितम ढाते हो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बनके मासूम जो घनश्याम मुस्कुराते हो

तुम्हे मालुम नही कितना सितम ढाते हो

सुनो हे राधिका जो तुम न नजर आती हो

तुम्हे मालुम नही कितना सितम ढाती हो

मुझे क्यों संवारे विस्वाश नही होता है

होके तू साथ मेरे साथ नही होता है

तुम्हे मिलता है क्या जो इतना तुम सताते हो

तुम्हे मालुम नही कितना सितम ढाते हो

बंधा हु राधिका मैं तेरे प्रेम बंधन में

वसी है खुशबु तेरे प्रीत की मेरे मन में

नचाता दुनिया को तुम मुझे नचाती हो

तुम्हे मालुम नही कितना सितम ढाते हो

ये दुनिया जानती है मैं तेरी दीवाणी हु

तू है इतहास मेरा मैं तेरी कहानी हु

हसा के जब भी श्याम मुझको तुम रुलाते हो

तुम्हे मालुम नही कितना सितम ढाते हो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।