मधानिया तेरे सिवा मियाँ मेरिये पीड़ा मेरिया किसे ना पेचानेया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तू ना करे ते करे केह्दा,मेरिया सबे जरूरता पुरिया नु

लोकी वेखदे ने एब गुनाह मेरे,ते में वेखदी रेहमता तेरियां नु

मधानिया ॥, तेरे सिवा मियाँ मेरिये

पीड़ा मेरिया,किसे ना पेचानेया॥

छोले ॥,जिंद दा ना कोई दर्दी

जिंद किह्दे नाल,दुःख सुख फोले॥

लोई,दर दर भटक लिया,

मिली किते ना, अम्दिये ढोई॥

फीता ॥, माइए असा मुह सी लिया

पर गिला ना किसे नाल कीता॥

मेहंदी ॥,चरणा च रख लै मियाँ

जिंद होर ना,विचोड़े सेहंदी॥

धग्गे ॥,अमर असी दास हा तेरे

साडे फेर क्यों,क्रम ना जाग्गे॥

ਤੂੰ ਨਾ ਕਰੇ ਤੇ ਕਰੇ ਕੇਹੜਾ,ਮੇਰੀਆਂ ਸਭੇ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਪੂਰੀਆਂ ਨੂੰ

ਲੋਕੀਂ ਵੇਖਦੇ ਨੇ ਐਬ ਗੁਨਾਹ ਮੇਰੇ,ਤੇ ਮੈਂ ਵੇਖਣ ਰਹਿਮਤਾਂ ਤੇਰੀਆਂ ਨੂੰ

ਮਧਾਣੀਆਂ ॥, ਤੇਰੇ ਸਿਵਾ ਮਾਏਂ ਮੇਰੀਏ,

मधानिया ॥, तेरे सिवा मियाँ मेरिये

ਪੀੜ੍ਹਾਂ ਮੇਰੀਆਂ, ਕਿਸੇ ਨਾ ਪਛਾਣੀਆਂ ॥

पीड़ा मेरिया,किसे ना पेचानेया॥

ਛੋਲੇ ॥ , ਜਿੰਦ ਦਾ ਨਾ ਕੋਈ ਦਰਦੀ,

छोले ॥,जिंद दा ना कोई दर्दी

ਜਿੰਦ ਕੇਹਦੇ ਨਾਲ, ਦੁੱਖ ਸੁੱਖ ਫੋਲੇ ॥

जिंद किह्दे नाल,दुःख सुख फोले॥

ਲੋਈ ॥, ਦਰ ਦਰ ਭਟਕ ਲਿਆ,

लोई,दर दर भटक लिया,

ਮਿਲੀ ਕਿਤੇ ਨਾ, ਅੰਮੜੀਏ ਢੋਈ ॥

मिली किते ना, अम्दिये ढोई॥

ਫੀਤਾ ॥, ਮਾਏਂ ਅਸਾਂ ਮੂੰਹ ਸੀਂ ਲਿਆ,

फीता ॥, माइए असा मुह सी लिया

ਪਰ ਗਿਲ੍ਹਾ ਨਾ ਕਿਸੇ ਨਾਲ ਕੀਤਾ ॥

पर गिला ना किसे नाल कीता॥

ਮਹਿੰਦੀ ॥, ਚਰਨਾਂ ਚ ਰੱਖ ਲੈ ਮਈਆ,

मेहंदी ॥,चरणा च रख लै मियाँ

ਜਿੰਦ ਹੋਰ ਨਾ, ਵਿਛੋੜੇ ਸਹਿੰਦੀ ॥

जिंद होर ना,विचोड़े सेहंदी॥

ਧਾਗੇ ॥, ਅਮਰ ਅਸੀਂ ਦਾਸ ਹਾਂ ਤੇਰੇ,

धग्गे ॥,अमर असी दास हा तेरे

ਸਾਡੇ ਫੇਰ ਕਿਓਂ, ਕਰਮ ਨਾ ਜਾਗੇ ॥

साडे फेर क्यों,क्रम ना जाग्गे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।