काहे तूने प्रीत सिखाई कृष्णा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

काहे तूने प्रीत सिखाई कृष्णा

ओ मेरे कान्हा काहे तूने प्रीत सिखाई कृष्णा

कान्हा तेरो आँखों से चलता है जादू

जादूगर लगता है सब से बड़ा तू

जादू चला के न मुझको उड़ा तू

हो ना जाऊ खुद से पराई कृष्णा

सिखा कहा तूने नींदिया चुराना

चोरी चोरी रतियो में सपनो में आना

पाया ये हुनर कहा इतना बताना खूबी तुनि एसी कहा पाई कृष्णा

काहे तूने प्रीत सिखाई कृष्णा

जियारा जराए रे तेरी मुरलियां,

उड़ उड़ जाए मेरी मन की कोयालियाँ

छोड़ दे सताना तू नटखट छलियाँ,

तू क्या जाने क्या होती जुदाई कृष्णा

काहे तूने प्रीत सिखाई कृष्णा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।