विश्वाश की डोरी टूटे न

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

विश्वाश की डोरी टूटे न दरबार तुम्हारा छुटे न

चमत्कार कुछ ऐसा करो के बेटा तुझसे रूठे न

तेरी मेरी प्रीत पुरनी याद है या फिर भूल चुके

या बाबा आँखों में तुम्हारे बन कर के शूल चुबे

तूने लिखी थी किस्मत जो किसी और के हाथो टूटे न

चमत्कार कुछ ऐसा करो के बेटा तुझसे रूठे न

सदा ही रखा मान मेरा हर वक़्त हर घडी पग पग में

बनके लहू तेरी भगती संवारा बेहती थी मेरे रग रग में

तेरी किरपा से भरा जो गागर किसी भी कारण फूटे न

चमत्कार कुछ ऐसा करो के बेटा तुझसे रूठे न

मान लिया सब गलती मेरी मैं नालायक बेटा हु,

हाथ पकड़ के हाथ न छोड़ो माना सिक्का खोटा हु

तूने दिया है विकास को जो कुछ और कोई इसे लुटे न

चमत्कार कुछ ऐसा करो के बेटा तुझसे रूठे न

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।