मेरे श्याम पे तुम विस्वाश करो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे श्याम पे तुम विस्वाश करो

विशवाश कभी न हारा है

भगवान् तो हारते देखा है पर भगत कभी न हारा है

नरसी ने भरोसे के दम पर सब राजसी भेभ्व छोड़ा था

मीरा ने नारायण की खातिर हरी नाम से नाता जोड़ा था

भगतो के लिए बीत जाते प्रभु इतहास गवाह ये सारा है

मेरे श्याम पे तुम विस्वाश करो

विस्वाश की डगर कठिन है जरा हर कोई नही चल पाता है

भगतो के एक कदम के लिए सो कदम कन्हिया बडाता है

मजधार भी उसका क्या करले मजधार भी बनता किनारा है

मेरे श्याम पे तुम विस्वाश करो

मेरे श्याम को मोहित करने का सीधा सा सरल ये नुस्का है

श्रधा और प्रेम समर्पण का मेरे ठाकुर को बड़ा चस्का है

दुःख तकलीफे आये जितनी संकट खुद बनता सहारा है

मेरे श्याम पे तुम विस्वाश करो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।