बैठे क्या सोचते हो झुंझुनू तो चल कर देखो ना

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

बैठे क्या सोचते हो झुंझुनू तो चल कर देखो ना

किस्मत पल में सवर जायेगे बिगड़ी वाहा पे सुधर जायेगी

तेरी दुआओं का भी होगा असर देखो न

थोड़े संभल जाओ दुःख से न गबराओ,

होके परेशान बैठे हो क्यों

दुखियो की सुनती है दादी मेरी चुटकी में हर लेंगी दुखड़े वही,

झुकना कही न पड़े गा चोकठ पे झुक कर देखो न

किस्मत पल में सवर जायेगे बिगड़ी वाहा पे सुधर जायेगी

मन से बुलाओगे गम भूल जाओगे

इतना भोरोसा तू करले जरा

बेठी है झुंझुनू में तेरे लिए दामन पकड़ लेगी पल में तेरा

रोना कभी न पड़े गा रो कर तू दर पे दिखा ना

किस्मत पल में सवर जायेगे बिगड़ी वाहा पे सुधर जायेगी

सब को निभाती है कष्ट मिटाती है माँ है दयालु ये कहते सभी

हर्ष तेरा काम बन जाएगा दुनिया में जो बन सका न कही

गिरना कही न पड़े गा चरणों में गिरकर देखो न

किस्मत पल में सवर जायेगे बिगड़ी वाहा पे सुधर जायेगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।